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पुरातत्त्वीय अभिलेख किस प्रकार बनावटी रूप में प्रस्तुत किये गये हैं।

ताजमहल को शाहजहाँ ने नहीं बनवाया था, फतहपुर सीकरी की स्थापना अकबर ने नहीं की थी, और  ना ही आगरे का लालकिला उसके बनवाया था। कुतुब मीनार कुतुबउद्दीन ने नहीं बनवाया था। इस प्रकार, लगभग प्रत्येक मध्यकालीन ऐतिहासिक भवन, पुल अथवा नहर का झूठा, असत्य निर्माण-श्रेय विदेशी मुस्लिमों को दे दिया गया है, यद्यपि तथ्य यह है कि इनमें से प्रत्येक वस्तु का निर्माण, शताब्दियों पूर्व ही भारत के हिन्दू शासकों द्वारा कर दिया गया था ।

इस प्रकार के असत्य, बनावटी प्रस्तुतीकरण का मूल कारण भारत की १२०० वर्षीय दीर्घकालीन दासता है जिसमें  विदेशी शासकों ने भारतीय पुरातत्व का सर्वनाश कर दिया है, और मनमाना खिलवाड़ किया है ।

It is a False History that Taj Mahal is built by Shah Jahan

भारत में ब्रिटिश शासन की स्थापना होने से पूर्व ‘पुरातत्व विभाग’ नामों निशान भी नहीं था। दीर्घकालीन विदेशी मुस्लिम शासन में हिन्दू-भवनों को बलात्-ग्रहण करने और उन्हीं को मस्जिदों व मकबरों के रूप में दुरुपयोग करने की एक लम्बी अकथनीय कहानी थी। इसलिए, भारत में जब ब्रिटिश सत्ता शासनारूढ़ हुई, तब सभी ऐतिहासिक भवन बहुत पहले ही मकवरों और मस्जिदों में परिवर्तित होकर मुस्लिमों के आधिपत्य और कब्ज़े में थे। जब ब्रिटिश लोगों ने भारत में सर्वप्रथम पुरातलल विभाग की स्थापना की, और सभी स्थानों पर विद्यमान  मुस्लिमों से परामर्श किया और उनकी बतायी हुई मनगढन असत्य बातों को अंकित कर लिया। ऐसी ही झूठी बाते भारत सरकार के सम्मानित पुरातत्व विभाग का मूल भाग बन चकी हैं।

Fatehpur Sikri is not established by Akbar

इन भवनों पर स्वामित्व अथवा कब्ज़ा किए हुए मृस्लिम लोग उन भवनों के मुस्लिम-पूर्व वास्तविक मूलोद्गम अथवा स्वामित्व पर सच्चा प्रकाश डालने में रुचि नहीं रखते थे क्योंकि उनको आशंका थी कि वदि उन्होंने किसी भी भवन के  हिन्दू-मूलोद्गम स्वीकार कर लिया या उसकी चर्चा कर ली, तो उनका उस भवन पर से अधिकार-स्वामित्व या कब्ज़ा छीन लिया जाएगा।

 किसी भवन के बारे में बार-बार यह कहने से, कि वह किसी का मकबरा अथवा मस्जिद है, स्वतः यह प्रपंच प्रचलित हो गया हो गया कि इस भवन का मूल-निर्माण ही उसी प्रयोजन से हुआ है। ब्रिटिश पुरातत्त्वीय विभाग के कर्मचारियों को अनुभव करना चाहिए था कि हिन्दुओं से छीन लेने के बाद उन भवनों को मकबरों और मस्जिदों के रूप में उपयोग में लाया गया था। उदाहरण के लिए, आज जिन भवनों को अकबर के. अथवा सफदरजंग के, अथवा हुमायू के मकबरे के रूप में देखता है, उनका भाव-द्योतन मात्र इतना ही हो सकता है कि (यदि सचमुच ही वहां कुछ है तो) वहाँ पर वे विशिष्ट व्यक्ति दफ़नाए गए है। किन्तु यह कल्पना करना कि वे राजभवनों के सदृश विशाल, भव्य भवन उनके दफनाने के स्थानों और स्मारकों के रूप में बनाए गये थे, घोर ऐैतिहासिक और पुरातस्वीय भूल है । वे भवन तो वहुत पहले से विद्यमान थे। विदेशी मुस्लिम विजित भवनों में निवास करते रहे और शायद वहीं दफ़ना दिये गये। उन विशाल, भव्य भवनों में इनका दफनाया जाना भी सन्दिग्ध ही है। यह भी हो सकता है कि उन भव्य भवनों के भीतर बनी हुई अधिकांश कब्रें झूठी और जाली हैं।

Qutab Minar has not been made by any Muslim Invader. It exits before Islam was born.

 ब्रिटिश सरकार ने जब भारत में पुरातत्त्व विभाग की स्थापना करनी शुरू कर दी, तब उन्होंने देखा कि ऐतिहासिक भवनों में से अधिकांश भवन मुस्लिम आधिपत्य और कब्जे में थे। अपने जाते हुए  साम्राज्य की विरही स्मृतियों को सँजोए हुए उन मुस्लिमों को इसी बात से पर्याप्त सन्तोष था कि कम-से-कम सभी भवनों को पूर्वकालिक मुस्लिम शासकों द्वारा बनाया हुआ ही घोषित कर दिया जाये। ब्रिटिस शाशन ने 1860 मे  Archaeological सर्वे आफ इंडिया की स्थापना की और उन्होने मुसलमानो के नाम कर दिये सारी इमारते।

 कुछ उदाहरण के लिए जानिए की अमरकोट किले के पास, सिन्ध प्रान्त में जिस स्थान पर पुरातत्त्वीय सूचना-पट यह बताते हुए लगा है कि यहाँ पर अकबर का जन्म हुआ था, वह स्थान सही नहीं है।

इसी प्रकार पंजाब में कलानौर नामक स्थान पर कुछ हिन्दू भवान हैं, जहां पर पुरातत्व विभाग की ओर से शिनाख्त के बाद यह सूचना-पट लगाया गया है कि यह वह स्थान है जहाँ पर १३वर्षीय किशोर अकुबर को बादशाह घोषित किया गया था। यही वह स्थान है जहा अकबर को उसके पिता बादशाह हुमायूँ की मृत्यु का समाचार उस समय सुनाया गया था जब १३वर्षीय अकबर वहाँ पड़ाव डाले पड़ा हुए था।

अकबर, जो उस समय बालक हैी था, उस स्थान पर किस प्रकार एक विशाल भवन निर्माण करा सकता था? उसका पितां भी बहाँ कोई भवन नहीं बनवा सकता था क्योंकि एक अन्य घमण्डी मुस्लिम सरदार द्वारा देश से बाहर खदेड़ दिये जाने के कारण, देश से बाहर १५ वर्ष तक रहने के बाद वह भारत में लौटा था । इसलिए यदि निर्दिस्त स्थान पर ही अकबर की ताजपोसी हुई थी, तो उसका अर्थ यह है कि वह उस समय एक पूर्वकालिक हिन्दू भवन में वह पड़ाव डाले हुए था जो पूरी तरह अथवा आंशिक रूप में बारम्बार होने वाले मुस्लिम आक्रमणों से नष्ट हो गया था।

इसी तरह मोहम्मद गवन एक घुमक्कड़ और खोजी व्यक्ति था जो बे-मतलब घूमता हुआ चौदहवीं शताब्दी में पश्चिमी एशिया के मृस्लिम देशों से भारत में आ पहुचा था । वह एक बहमनी सुलतान का वज़ीर हो गया किन्तु एक बहुत थोड़ी अनिश्चित अवधि मात्र के लिए ही। उमका पतन भी समान रूप में हड़बड़ी में हुआ । उसकी हत्या भी उसी सुलतान के आदेशानुसार की गयी जिसका मोहम्मद गवन वजीर था। सामान्यतः जो व्यक्ति शासक या सुलतान की नजरों से गिर जाता था, उसको नियमित रूप से दफ़नाया भी नहीं जाता था। ऐसे  व्यक्ति के शरीर के ट्कड़े-टुकड़े कर दिये जाते थे और बोटियों को चीलों और कृत्तों के खाने के लिए फैंक दिया जाता था। मोहम्मद गवन का अन्त इससे कुछ अच्छा नहीं हो सकता था। यह बात इस तथ्य से भी स्पष्ट थी कि सन् १६४५ ई० तक उसकी कब्र पहचानी नहीं जा सकी थी। फिर, अचानक कोई मूस्लिम उग्रवादी पुरातत्त्वीय कर्मचारी  बीदर गया और वहाँ सड़क के किनारे बनी हुई असंख्य, नगण्य, अनाम कब्रों में से एक को मोहम्मद गवन की कब्र घोषित कर आया। उस समय से ही सभी प्रकार के अन्वेषक जबर्दस्ती उस कब्र को मोहम्मद गवन की कब्र के रूप में उल्लेख करने लगे क्योंकि अब उसपर सरकारी छाप और मान्यता उपलब्ध हो गयी थी।

कुछ दसको पूर्व एक पूरातत्त्व कर्म चारी के मन में यह विचार आया कि अबुल फ़ज़ल की कब्र को खोजा जाय। अबुल फ़ज़ल तीसरी पीढ़ी के मुग़ल बादशाह अकबर का दरबारी और तथाकथित स्वघोषित तिथिवृत्त लेखक था। इतिहास में उल्लेख है कि सन् १६०२ ई० के अगस्त मास की १२तारीख को नरवर से १०-१२ मील की दूरी पर सराय बरार नामक एक स्थान के आस-पास अवूल फ़ज़ल को धात लगाकर मार डाला गया था उसके टुकड़े-टुकड़े कर दिये गये थे । इस प्रकार की निरर्थक, अनिश्चित और सुनी-सुनायी बातों से प्रारम्भ करते हुए बह कर्मचारी निर्दिष्ट स्थान पर जा पहुँचा। वहाँ उसने देखा कि एक बड़े क्षेत्र में बहुत सारी कब्रें इधर-उधर बिखरी पड़ी हैं। अफ़सरशाही के अनुसार धारणा बनाते हुए उसने लगभग बीसियों कब्रों में से कुछ कब्रों का एक समूह चुन लिया और यह विचार कर लिया कि उनमें से एक तो अबुल फ़ज़ल की कब्र होगी तथा शेष उसके उन परिचरों की होंगी जो उसके साथ ही उस घात में मारे गये होंगे। अगला प्रश्न यह था कि उन चार या पाँच कब्रों में से अबुल फ़ज़ल की कब्र को किस प्रकार पहचाना जाए । इन चार या पाँच कब्रों में से एक कब्र अन्य कब्रों से कुछ इंच अधिक लम्बी थी वही उसकी होगी। पुरातत्व कर्मचारी के लिए वह पर्याप्त और बहुत बड़ी बात थी । महान अकबर के सम्मानित दरबारी को दफ़नाने के पवित्र स्थान के रूप में इसे तुरन्त पहचान लिया गया था । पुरातत्त्वीय पंजिकाओं में भी इस तथ्य को इसी प्रकार अंकित कर दिया गया । इसके इर्द-गिर्द कमरा बनाने के लिए और कदाचित् एक स्थायी रूप में देखभाल करने वाले का वेतन भुगतान करने के लिए कुछ धन-राशि मंजूर कर दी गयी थी । उस समय से इतिहास और पुरातत्त्व के असावधान विद्यार्थी-गण विवश हो गये थे कि वे उस स्थान को अबुल फ़ज़ल की हत्या के रूप में स्थल को शैक्षिक मान्यता दें |।

जब अकबर ने स्वयं ही अबुल फ़ज़ल की कब्र की कोई परवाह नहीं की अथवा उसकी कब्र की पहचान में वह असमर्थ रहा, तो ४५० वर्षों के बाद, बिना किसी विशिष्ट आधारभूत सामग्री के नगण्य क्षेत्र में बिखरी पड़ी सैकड़ों कब्रों में से अबुल फ़ज़ल की कब्र को इस प्रकार पहचान सकने की कोई आशा कोई पुरातत्व-कर्म चारी कर सकता था ?

ये उदाहरण इस बात के लिए पर्याप्त होने चाहिए कि पुरातत्त्व और इतिहास के कर्मचारी और विद्यार्थी-गण ऐतिहासिक (मध्यकालीन) स्थलों के सम्बन्ध में पुरातत्त्वीय पहचान की ओर अधिक विशेष ध्यान न दें, उन पर अत्यधिक विश्वास न करें । विभिन्न अन्तः-प्रेरणाओं, मनोभावों के कारण झूठी-सच्ची बातें लिखी गयी हैं । सभी पुरातत्त्वीय अभिलेखों को, अत्यन्ता सावधानीपूर्वक संशोधित करने, पुनः देखुने-भालने और संकलिंत करने की आवश्यकता है।

Apes Were Our Ancestors, Or We Are Now Becoming Apes?

First, we must understand the purpose of inventing these baseless theories in the 19th and 20th centuries by Europeans. They had two mammoth tasks, first shrouding the glorious History of India, and the second to erase traces of their legacy of Vedic culture.

Till about 200 years back, the world knew about Indian rich inheritance of culture, knowledge and technological advancement which existed in India. India was the wealthiest nation, and for that reason, it had been attacked by foreigners to plunder its wealth. Europeans plundered India through trade for many centuries. Britishers were having a great time in the 18th century, and later they decided to make India their colony. Nineteenth-century was their time, and they were dominating almost half of the world. They had to establish their supremacy and, and it was essential for them to condemn and shroud everything which speaks about greatness about India. To create a Eurocentric history, they sponsored many historians, scientists, researchers for the creation of many false and fake theories.

For the last 150 years, the world believes that Darwin’s evolution theory is a proved fact based on fossils. In school or college books, we are given to Read the hypothesis or the assumption that man arose from an ape in millions of years. One comes across many names, such as Nebraska man, Java man, etc. and reads the explanation that scientists have discovered certain remains of a man and these are millions of years old. The whole History is, therefore, based on the concept that apes were the ancestors of man.

A school going student has a tender mind, for him, a teacher is an official authority, and he easily believes these theories. Further, students see this in printed books with pictures with names of eminent scientists. Even after they are grown up, they are gullible enough to believe in what the scientists say. Science has achieved so many things that it is difficult to think that it can be wrong. A commoner may disbelieve a minister, a philosopher and even a religious preacher but, in this phase of the twenty-first century, one finds it hard to disbelieve the pronouncements of a scientist. So, if a scientist says that he has found a jaw-bone or a tooth of a man that lived so many million years ago, a layman thinks it must be correct because he does not have the scientific knowledge or back-ground to question its validity. Moreover, the reports in newspapers and periodicals are so brief that he does not have sufficient material to contradict it.

Of course, some scientists and researchers spend time and find out lacunas later, but by that time world has moved on, and their findings do not fall in line with the preset agenda.

Big-bang Theory – Has the World an Origin?

Hen Came first OR the Egg Came First

Many modern scientists believe that the Universe originated from a ‘Cosmic Egg’, by a catastrophic explosion, called ‘big bang’. They rule out its creation by God. On the contrary, many religionists believe that, initially, God created the world. The question is which one of these two hypotheses is more rational? Can anyone of these be sustained based on reason or scientific proof?

Was the Universe created at some point of time or it is eternal?

“How and when did this universe or the world come into existence?”

George Lemaitre

Most of the major religions also have tried to solve this cosmic riddle in their way. Over the last four or five centuries, astronomers, astrophysicists and geologists also have tried to tackle this question in their typical ways. They have formulated many theories, or better, call them ‘hypotheses’ because these have not yet attained the status of ‘theories’. We will discuss here only the most popular and most fashionable or current theories of origin, to see if these have satisfactorily solved the question.

One of the two most popular theories, mentioned in science books, was first proposed by the Belgian astronomer Georges Edward Lemaitre (1894-1966). In the year 1927, he suggested that, at a point of time in the remote past, there existed only one large lump. At that point of time, call, it ‘zero time’-the Matter and energy of the Universe was squashed or compressed together into one huge mass, according to him, the cosmos was ‘born’ out of this colossal mass. Lemaitre said that this ‘zero time’, when the ‘egg’ exploded, refers to the point of time about two billions of years ago, but, since Geologists considered the Earth to be older than 2 billion years, some cosmologists, later, raised this figure to 5 billion and, subsequently, to 13.8 billion years ago.

Initially, the Matter, which formed the cosmic egg, was hydrogen gas. A hydrogen atom is made of two particles only. There is a central proton, carrying a positive electric charge and an outer electron, carrying a negative charge. As long as these sub-atomic particles exist separately in the atom, there is a limit to which a mass of hydrogen gas can be compressed. But when the critical pressure is surpassed, the electron and proton in every atom of hydrogen gas may be considered to have been squashed very very hard or condensed very densely together to form a mass of electrically uncharged particles, called neutrons. Such a mass of compressed neutrons is also called neutronium’. It would have a density of 1,000,000,000,000,000 grammes per cubic centimetre and would be far denser than any known thing, for this is the ultimate limit in compressing that can be reached and, at this stage, the mass of Matter becomes unstable. Now Lemaitre says that at ‘zero time’, the densest and unstable cosmic egg exploded in what we can now only imagine having been the most gigantic and catastrophic explosion of all time. Sir Arthur Eddington, a famous English scientist, adopted and popularized this hypothesis.  Later, Russian-American astrophysicist George Gamow (1904-1968) upheld and propagated it enthusiastically. It was Gamow who gave it the name ‘Big-bang Theory2.

According to this theory, the fragments catastrophic explosion sent hurtlíng out in all directions, and they became the galaxies. Not only did portions of the cosmic egg form the present-day galaxies but, on a more subtle level, the cosmic egg broke up to form various atoms and 102 elements we know today.

Does this ‘theory’ or hypothesis solve the question of origin? From where did the ‘Cosmic Egg’ come into existence? Which ‘hen’ laid this ‘egg? And, whether that ‘hen’ was first or the egg was first? In other words, how did hydrogen or its electrons and protons or neutronium originate?”

To answer this question, scientists take refuge in the concept of Eternity and the law of conservation of mass and energy. They say that the Matter, making up the cosmic egg, was always there because Matter is Eternal and is always conserved; it never gets annihilated. Well, let us take it for granted that Matter, forming the cosmic egg was always there; the crucial question is whether the Matter was there in the form of the cosmic egg? If one says: “Yes, it was always in the form of cosmic-egg”, then one would like to ask: In that case, the cosmic egg should have remained stable in that form for, there was nothing else there to disturb it; why did it suddenly (at zero time’) cease to be stable? What led to its explosion after billions of years of stability? What were the forces, which, initially, had been keeping it stable and what new forces now, suddenly, brought about the explosion? Scientists have no satisfactory answer to these questions on which depends the validity or credibility of this theory. Is the scientists’ answer satisfactory? No doubt, scientists have tried to solve these and such other problems, but without any substance to give it credibility. A much too common answer the scientists give is: “Before the ‘cosmic egg’ came into existence, there was an exceedingly thin gas. This gas had its own vastly diffused gravitational field. Gradually, over billions of years, the gas collected and the mass of the gas grew close together. As the substance of the Universe grew more compact, the gravitational field became more intense until, after many billions of years, the Universe went on contracting at a greater and greater speed. In this process of contraction, it produced higher, and higher temperature as the gas compressed into smaller and volume. This temperature-rise increasingly countered the gravitational contraction and began to slow down the process of contraction. However, the inertia of Matter kept it contracting more and more until it was past the point where the temperature effect had just balanced gravitation. Finally, the Universe contracted to a minimum volume, represented by the cosmic egg At some point, the outward push of the temperature and radiation, finally overcomes the gravitational force, and this builds up into a force that results in the ‘big-bang’. In this view, the cosmic egg becomes a flying object. How was the ‘cosmic egg’ first formed?

In view, Newton’s First Law of Motion which states that- “everything keeps in its state of rest or motion unless there is an external force is applied to it.” The question is: “Since there is nothing else besides the thin gas, what led the gas to collection to draw close? Since the force of gravitation remained the same ‘for billions of years’,  how did it increase to contract the gas-substance?  According to the First Law, et Conservation of Mass and Energy, the total mass and energy the Universe remain the same; they neither increase nor decrease; so, the question is what additional force or energy outside the gas-mass initially led the gas-particles to draw closer and closer? No scientist, to this day, has solved this riddle.

Moreover, none has ever explicitly stated the actual size of the cosmic egg, or its total mass, or the force of the explosion that rent it into fragments so that its pieces hurtled away and managed to attain ‘the escape velocity’ to form galaxies. Also, the question is: “If the cosmic egg hurtled its segments to form galaxies, wherefrom did the Matter in the space between these galaxies come? Further, the Universe is infinite or of very vast expanse, did the hydrogen gas fill the whole Universe or the thin cloud occupied only a part of it? If it filled a part of it, why did it occupy only that much space that it did, and how did it initially have only that much density or thinness and neither more nor less? If it filled an infinite space, how could, then, it’s so weak gravitational field, especially at its farther parts, lead it to contraction?

Another question is whether the parts of the cosmic egg that hurtled out and formed galaxies will continué receding from each other for ever or their velocity of recession will slowly decline with time and will reach a momentary zero mark? And, then, will the galaxies finally begin to come together again, slowly at first and then more and more rapidly and will, finally, condense to form something like the cosmic egg constituted of hydrogen again? Following the formation of the cosmic egg, will there be another big bang to start over again? in the fashion of the egg giving birth to the hen and the hen laying an egg and the egg again breaking to give birth to another hen, the series extending to infinity.

If the Universe is like an egg and a hen, then, where is the beginning? Where are the irreversible change and the final ending? Will the process continue ceaselessly. Thus, it fails to explain any origin in the actual meaning of the term.

How did British Tarnish Image of Indian Culture

Indian civilisation is the most ancient and most advanced civilisation. Indians remained wealthiest and most accomplished nation for 4800 years in the continuous history of 5000 years. It is for the last 250 years that glories story of India started getting tarnished when Britishers started colonised India in late 1700.

India was so wealthy that foreigners started invading India from 7th century BC. First, the first known invader was Babylonian queen Semiramis, followed by Cyrus, founder of the Persian empire, Alexander the Great from Macedonia, Seleucus from Greece, Hunas from Central Asia, Mohd. Bin Qasim, Mahmud of Gazni, Mu’izz al-Din, Changez Khan, Babur, Portuguese, Dutch, French, Danish and Britishers.

One can imagine how much efforts and money must have been spent on those invading expedition. It involved the long passage of large armies numbering in several thousand of soldiers, their food, cavalry and artillery involving high costs. Indeed, promised reward must have been worthwhile as the amount of booty was staggering for them to venture into such invasions.

Invaders did their best to plunder the wealth by looting and destroying thousands of rich temples. All efforts were made to destroy its culture and heritage, and millions were killed.

Despite so many perils and atrocities, for  4800 years India managed to remain a wealthiest and most advanced nation. But then Indians ultimately lost the battle against British rulers, who were most cunning, ruthless and cruel.

BRITISH TARNISHED INDIA
BRITISH TARNISHED INDIA

Even for the British, it was an enormous task, it was like covering the sun with the clouds. however, they left no stone unturned and took all actions to achieve what could not be achieved in 4800 years. Their efforts can be summarised in seven categories.

1. Theory of Big Bang. This theory was invented by a Belgian Astronomer Georges Edward Lemaitre. It says that 138 crore years ago there was nothing in the world, just a blank without time. Then a gaseous formation like a big balloon is created, the universe was compressed within this massive lump. The gas inside the mighty balloon creates outward pressure, resulting in bursting of the balloon and with those gaseous elements universe is created. Any person with some logical mind can understand that this is a hypothesis based on wild imagination without any evidence. But the British were too happy to embrace it as a theory because it would serve well against the claim of millions of years existence of Sanatan Dharma.

FALSE BIG BANG THEORY

2. Charles Darwin invented the Theory of Evolution in England. He published his hypothesis in his book “On the Origin of Species” in 1859. The essence of his hypothesis is that once upon a time, there were no living beings, and today’s human has evolved from the single-cell amoeba in millions of years. They passed through stages of the smallest form of creatures like insects, reptiles, animals, monkeys, apes to the present-day men. Britishers were too happy to embrace this theory as this would be an antidote of Hindu faith which speaks of their highly elevated ancestry. Promptly newly fabricated theory of evolution was introduced in curricula of schools, and later it became bottom line for making of histories.

3. Aryan Invasion Theory In the 1850s, Max Muller introduced a hypothesis that the Aryans are not original inhabitants of India; instead, they migrated from the west and central Asia into the north of India. The Dravidians were the original inhabitants, and they were chased down to the southern part of India by Invading Aryans. This false theory was highly convenient for British colonizers who were in the process of destroying Indian culture, education eco-system. They promptly started publicizing thesis and got historians to create history based on Aryan Invasion Theory and Darwinian Theory of Evolution. It was introduced into the curricula, and even now it is patronized in our history books

ARYAN INVASION THEORY IS A MATTER OF SHAME FOR INDIANS

4. Lowering of Status of Sanskrit Language is the most authentic factor in establishing the linage and age of any civilization. When Max Muller was translating Rig Veda, he discovered that quite a lot of Sanskrit words are similar to Latin, Greek, German, French & English. The apparent reason was that all the languages had their origin in Sanskrit.  But the British did not want to honour the right place to Sanskrit. They falsely invented “Indo-European Language” and published that all the languages including Sanskrit have branched out from the imaginary “Indo-European Language” of which there is no trace and evidence in the world.

SANSKRIT IS MOTHER OF ALL LANGUAGE

5. Conversion of Hindus to Christianity Billions of native Hindus was converted to Islam and Christianity. They became critics and opposers of Vedic Culture. Invaders like Muhammed Qasim, Aurangzeb, Tipu Sultan, Nizam of Hyderabad, Sufi Saints played a vital role for conversion to Islam. Christian missionaries following Vasco Da Gama from Portugal started converting Hindus as early as 1542. Since then the process is going on even till the time of writing of this passage. British made hundreds of strategies for conversion. After the war for Independence in 1857, Lord Palmerston told the Archbishop of Canterbury, ‘The sooner Christianity is propagated to the maximum number of people in Bharat, the more beneficial it will be for our empire.’

2. Destroying of Educational Eco System In 1835, Lord Macaulay landed in India, and he made strategies to destroy the prevailing Indian Education fabric in multiple ways. Macaulay wrote in his minute “we must at present do our best to form a class of persons Indian in blood and colour and English in taste, opinions in morals and in intellect,” Most ruthlessly entire education system was destroyed, Sanskrit & Arabic were banned. Army officers wrote books on Indian histories. False values were propagated, which made Indians dumbs, and unfortunate situation has not changed even today.

  • Islamisation of Hindu Monuments Britishers knew the “divide and rule.” They thought of a naughty way to degrade Hindu culture, architecture and grandeur by Islamisation of most of the Hindu architecture and monuments like Taj Mahal, Agra Fort, Red Fort, Kutub Minar, Imambaras,  Fatehpur Sikri to name a few out of hundreds. To achieve this, they created a new department “Archaeological Survey of India” in 1861. Lord Cunningham, who retired from the British Army was reappointed as a Surveyor of this department. He made a list of all sites in India for five years. Then abruptly department was closed officially, but Cunnigham kept on working secretly. He changed records, tablets and history about these establishments and temples, and some places domes were replaced. Again the department was reopened in 1871, and he ascribed all these architectures to Muslim rulers

Thanks to the robust culture, even after so many batterings it has survived. No ancient culture has survived like Vedic culture. There is a record of 45 other civilisations which began later, and they have all perished, Its only Indian civilisation which is surviving even now and again getting ready to be the world leader.

हम विश्व गुरु थे और विश्वास रखे कि फिर से बनेंगे।

आज मैं आपसे ऐसे तथ्यों के बारे में चर्चा करना चाहता हूं जिसकी विश्व को छोड़िए भारत के लोगों को ही जानकारी नहीं है। इन तथ्यों को प्रमाणिक तरीके से इकठ्ठा करने के लिए मैंने 30 वर्षो मे 200 से अधिक पुस्तकों का अध्ययन किया जिनमें 2-3 सौ वर्ष पुरानी कई पुस्तकें है , 60 देशों में भ्रमण कर ऐतिहासिक स्थलों का जमीनी अध्ययन किया और इतिहासकारों और रिसर्चर के साथ मुलाकात की और वार्तालाप किया.

5000 वर्षो के लगातार इतिहास मे 4800 वर्षो तक भारत विश्व का सबसे धनी, संपन्न और उन्नत राष्ट्र था।  हमारे पूर्वजो के पास हर प्रकार का ज्ञान और विज्ञान था। उन्हें पूरे ब्रम्हांड का, आकाश, सौर मंडल, पृथ्वी का, भूगोल का, प्रकृति और वानस्पति का पूरा ज्ञान था। उन्हें आध्यात्मिकता का भी संपूर्ण ज्ञान था जिसमें जीवन का उद्देश्य, जन्म, मृत्य, पुनर्जन्म, आत्मा, परमात्मा, मृत्यु के पश्चात आदि जानकारियां थी।
इतनी संपन्नता थी कि हर काल में विदेशी आक्रांताओ की दृष्टि भारत को लूटने की रहती थी। आज से 2700 वर्ष पूर्व से ही माना जाता है है कि बेबीलोन की महारानी समीरामि ने 3 लाख सैनिकों को लेकर भारत मे आक्रमण किया था, ग्रीस से अलेक्जेंडर 2300 वर्ष पूर्व और फिर उसके सेनापति सेल्युकस ने भी आक्रमण किया। मंगोल सम्राट चंगेज़ खान और फिर पिछले 1200 वर्षो से अफ़ग़ान और मुगल का आक्रमण और शाशन, फिर पिछले 500 वर्षो से यूरोपियन आक्रान्ताओ का दौर शुरू हुआ, जिसमें पुर्तगाली, डच , फ्रेंच , डेनिस और ब्रिटिशर है।

Dinesh Rawat


आप कल्पना कर सकते हैं कि कितना अथाह धन और सम्पदा रही होगी कि हज़ारों मिलों से ये लोग कितना रिसोर्स लगा कर भारत मे आए तो कितना लुटा होगा। इतना सब होने के बाद भी भारत आज से करीब सवा दो सौ वर्ष पहले तक विश्व का सबसे महत्वपूर्ण देश था, 93% जनसंख्या शिक्षित थी।
यही नहीं भारत ही सारे विश्व को शिक्षा देता था, यहा तक्षशिला विश्व विद्यालय 2700 वर्षो पहले 10000 विद्यार्थियों को शिक्षित करता था, उस समय संसार मे किसी भी धर्म का जन्म नहीं हुआ था।
भारत के इस महान अतीत के बारे में विश्व के लोगों को  जानकारी क्यू नहीं है, विश्व को छोड़ भी दे तो यहा भारतवासियों को भी इसकी जानकारी  क्यू नहीं है।
यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है कि कैसे भारत के इस गौरवशाली इतिहास को छिपाया गया है। आज जरूरत है कि हर भारतीय को अपनी विरासत का पता होना चाहिए। मैं आपसे आने वाले वीडियो मे आपको पूरी जानकारी दूँगा की भारत का सत्य इतिहास क्या है, किस तरह के षडयंत्रों द्वारा इसे धूमिल कर दिया गया, किस तरह भारतवासीओ को ही इसके विरुद्ध खड़ा कर दिया गया है। आज ज्यादातर लोग यही समझते हैं कि भारत एक बहुत ही गरीब देश रहा और अमेरिका, जापान, पश्चिम के, यूरोपियन देश बहुत उन्नत है और वहां से शिक्षा पाने के लिए आज भी हज़ारों विद्यार्थि गौरवांवित महसूस करते हैं। अंग्रेजी ना जानने वालों को हम प्रायः अशिक्षित ही मानते हैं। आज यह अत्यंत आवश्यक है कि भारत का हर नागरिक अपने महान अतीत के बारे में जाने और गर्वित महसूस करे। उसमे विश्वास जागे की हम विश्व गुरु थे और फिर से विश्व हम ही सर्वश्रेष्ठ बनेंगे.

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